HomeNewsसाल का आखिरी सूर्य ग्रहण, सुबह से बंद रहे मंदिरों के पट

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, सुबह से बंद रहे मंदिरों के पट


ग्रहण पूर्ण होने पर मंदिरों की साफ-सफाई किये जाने के बाद पूजा-अर्चना की गई

मंगलवार को साल का आखिरी सूर्यग्रहण है। ग्रहण को लेकर सूतक तकरीबन सुबह चार बजे लगने से सुबह से मंदिरों के पट बंद रहे। शाम को ग्रहुण पूर्ण होने के बाद मंदिरों की साफ-सफाई किये जाने के बाद पूजा-अर्चना की गई। पार्ले प्वाइंट स्थित मा अंबे मंदिर, राधाकृष्णा मंदिर सहित शहर के सभी मंदिरों में ग्रहण के बाद साफ-सफाई के बाद पूजन-अर्चन की गई। 

दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच सूर्य ग्रहण का ऐसा संयोग कई वर्षो बाद पड़ा


हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष कार्तिक अमावस्या तिथि पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हुए दिवाली का त्योहार मनाया जाता है और अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। लेकिन इस बार दिवाली के फौरन बाद ही आंशिक सूर्यग्रहण लगने से कई वर्षों बाद दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा न होकर एक दिन का अंतर है। दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच सूर्य ग्रहण का ऐसा संयोग कई वर्षो बाद पड़ा है। एक गणना के अनुसार पिछले 1300 वर्षों बाद सूर्य ग्रहण दो प्रमुख त्योहार के बीच पड़ने के साथ बुध, गुरु, शुक्र और शनि सभी अपनी-अपनी राशि में मौजूद रहेंगे। साल का यह आखिरी आंशिक सूर्यग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में सूर्यग्रहण दिखाई देने से इसका सूतक काल मान्य होगा। जिसके कारण ग्रहण से संबंधित धार्मिक मान्यताएं का पालन किया जाएगा।  

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प्रतिकारात्मक तस्वीर

 ग्रहण लगने के 12 घंटे पहले से सूतक काल प्रभावी हो गया था


भारत में ग्रहण शाम 4 बजकर 29 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजकर 9 मिनट पर खत्म होगा। सूर्यग्रहण के बाद 8 नवंबर को चंद्रग्रहण पड़ रहा है। इससे पहले, महाभारत युद्ध से पहले 15 दिनों में दो बार ग्रहण पड़ा था।  ग्रहण लगने के 12 घंटे पहले से सूतक काल प्रभावी हो गया था यानी सुबह 4 बजे से सूतक लग गया था। ग्रहण को भारत समेत दुनिया के कुछ हिस्सों में देखा जा सकता है भारत में सूतक काल भोर में 4 बजे से शुरू हो गया था। ग्रहण की वजह से गोवर्धन पूजा 25 अक्टूबर की जगह 26 अक्टूबर और भैया दूज 26 अक्टूबर की जगह 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा। दीपोत्सव भी इस साल पांच दिन की जगह 6 दिन तक चलेगा। 

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