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वाहन चोरी में शिकायत करने में देरी होने पर भी बीमा कंपनी नहीं कर सकती क्लेम आवेदन को रद्द, देने होंगे दो तिहाई पैसे


कार चोरी होने पर मालिक ने आठ दिन बाद कंपनी को दी चोरी की जानकारी, कंपनी ने टर्म्स एंड कंडीशन का हवाला देते हुए रद्द कर दिया क्लेम का रिक्वेस्ट

किसी भी वाहन के चोरी हो जाने पर वाहन मालिक को इसकी जानकारी तुरंत ही पुलिस और अपने पॉलिसी कंपनी को देनी चाहिए क्योंकि पॉलिसी के टर्म्स एण्ड कंडिशन के अनुसार यदि वाहन चोरी की सूचना बीमा कंपनी और पुलिस को आठ दिनों की देरी के बाद दी जाती है, तो बीमा कंपनी चोरी हुए वाहन की पूरी दावा राशि को अस्वीकार नहीं कर सकती है। इसी मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सूरत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम के अध्यक्ष न्यायाधीश पीपी मेखिया, सदस्य पूर्वीबेन जोशी और डॉ तीर्थेश मेहता ने अहम फैसला सुनाते हुए कार चोरी होने के मामले में क्लेम की 75 फीसदी राशि ब्याज समेत चुकाने का बीमा कंपनी को आदेश दिया। पीठ में माना कि समय पर सुचना देने के नियम का उल्लंघन होने मात्र से बीम कंपनी क्लेम चुकाने से इनकार नहीं कर सकती, यह मानते हुए ग्राहक कोर्ट ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है।

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२०१७ में चोरी हुई कार के मामले में हुए सुनवाई में आया फैसला

मामले की जानकारी के बारे में बताते चले तो जुलाई 2015 में, पर्वत पाटिया के खोडियारनगर निवासी शिकायतकर्ता किशोर बाबू परमार ने 4.13 लाख रुपये का मारुति वैगन वीएक्सएल कार ऋण लिया और एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 3.41 लाख रुपये की बीमा राशि की निजी कार पैकेज पॉलिसी ली। दो साल बाद कार चोरी हो जाने पर पुलिस में शिकायत की गई और बीमा कंपनी को क्लेम किया गया। लेकिन बीमा कंपनी द्वारा पॉलिसी की शर्त के उल्लंघन के लिए बीमाधारक के दावे को खारिज करने के बाद परवत पाटिया खोडियार नगर सोसायटी निवासी किशोर बाबू परमार ने अधिवक्ता मोना कपूर के जरिए एचडीएफसी एरगो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ ग्राहक कोर्ट में शिकायत की थी। उन्होंने थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाने के बाद बीमा कंपनी में क्लेम किया था, लेकिन शिकायत देरी से दर्ज करने का कारण बताकर बीमा कंपनी ने क्लेम चुकाने से इनकार कर दिया था।

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कोर्ट ने कंपनी को दिया पैसे देने का आदेश

सुनवाई में बीमा कंपनी ने कहा कि शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी को आठ दिन और पुलिस को नौ दिन वाहन चोरी की सूचना देकर पॉलिसी की शर्त का उल्लंघन किया है। जबकि शिकायतकर्ता की ओर से मोनकपुर के सर्वोच्च न्यायालय ने उन्लांडू शाह बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के फैसले का निष्कर्ष प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि सिर्फ पॉलिसी की शर्तो के उल्लंघन मात्र से बीमा कंपनी क्लेम चुकाने से इनकार नहीं कर सकती। कोर्ट ने क्लेम की 75 फीसदी राशि सात फीसदी ब्याज के साथ चुकाने का बीमा कंपनी को आदेश दिया। कोर्ट ने बीमा कंपनी को कुल क्लेम राशि 3.41 लाख का 75 फीसदी यह बताते हुए भुगतान करने का आदेश दिया है कि बीमाधारक व्यक्ति इसका हकदार है।

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