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पति द्वारा दायर तलाक के मुकदमे में पत्नी को अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश


नाबालिग पुत्रीयों तथा पत्नी का त्याग करने वाले पति को मासिक 7000 भत्ता देने का न्यायालय का आदेश

सूरत के उधना में रहने वाली पत्नी हेतल मोदी की शादी वर्ष 2006 में सूरत के खटोदरा में रहने वाले याचिकाकर्ता पति से हुई थी। उनकी शादी से दोनों पक्षों को दो बेटियों का जन्म हुआ।शादी के बाद पत्नी संयुक्त परिवार में पति के साथ वैवाहिक जीवन जीने चली गई। शादी की छोटी अवधि के दौरान  पति और उसके परिवार के सदस्य विवाहिता को छोटी-छोटी बातों पर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। पति और उसका परिवार बार-बार पियरे से पैसे लाने का दबाव बनाकर उसे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ित किया।  

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स्विफ्ट कार लेने का दबाव बनाया गया 

पति ने स्विफ्ट कार लेने का दबाव बनाने पर पत्नी ने मां से रुपये की मांग की।  3,50,000/- नकद लिया और याचिकाकर्ता ने पति को दे दिया। पति नाबालिग बेटियों का खर्च भी वहन नही कर रहे थे और अपने वेतन का इस्तेमाल निजी खर्च के लिए कर रहे थे। पति और उसके परिवार के सदस्यों ने याचिकाकर्ता  को शारीरिक-मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना देकर अप्रैल 2019 में नाबालिग बेटियों सहित घर से बाहर निकाल दिया। तब से विवाहिता अपनी नाबालिग बेटियों के साथ मायके में रहती थी। इसके बाद पति ने पत्नी पर झूठे आरोप लगाकर तलाक का मुकदमा कर दिया। याचिकाकर्ता द्वारा दायर तलाक के दावे में प्रतिवादी पत्नी की ओर से अधिवक्ता प्रीति जिग्नेश जोशी और राहुल कोन्ट्राक्टर पेश हुए। 

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याचिकाकर्ता की कोई आय न होने से आवेदन दायर

याचिकाकर्ता ने पति या पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण न करने के लिए एक अंतरिम आवेदन दायर किया क्योंकि पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण का कोई प्रावधान नहीं है।

 जिसमें पत्नी की ओर से दलील दी गई कि, ”दूध, चाय, सब्जी, काली मिर्च मसाले, बच्चों की पढ़ाई का खर्च, आवेदक और बच्चों का निजी खर्च आदि दैनिक जरूरत की चीजें महंगाई में काफी महंगी हैं। याचिकाकर्ता महिला की कोई आय नहीं हैं। इस प्रकार से दलीलों पर विचार करते हुए, सूरत परिवार न्यायालय के न्यायाधीश आई बी पठान ने याचिकाकर्ता पत्नी को रुपये 7000 का भुगतान करने का आदेश दिया। 7000/- रखरखाव के रूप में और रु. 5000/- को आने-जाने के खर्चे का भुगतान करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रीति जिग्नेश जोशी और राहुल कांट्रेक्टर ने दलीलें दीं। पार्टियों के नाम बदल दिए गए हैं। 

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