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दोस्त की नाबालिग बहन को शादी का झांसा देकर किया था दुष्कर्म, अदालत ने 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है


विशेष अदालत ने 20 साल के कठोर कारावास, 10,000 जुर्माना और पीड़ित को मुआवजे के रूप में 1,000,000 की सजा सुनाई

सूरत के इच्छापोर थाना क्षेत्र में रहने वाली दोस्त की 15 साल की बहन को तीन साल पहले शादी का झांसा देकर घर से भागाकर एक से अधिक बार दुष्कर्म करने वाले मामले में 19 वर्षीय आरोपी युवक के मामले पर सुनवाई करते हुए पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शकुंतलाबेन सोलंकी ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के उल्लंघन के लिए 20 साल के कठोर कारावास, 10,000 जुर्माना और पीड़ित को मुआवजे के रूप में 1,000,000 की सजा सुनाई है। साथ ही जुर्माना न चुका पाने की स्थिति में एक साल अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई।

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मामले के बारे में बताते चले तो कावास ग्राम के सोनी बिल्डिंग भवानी मोहल्ला में रहने वाले आरोपी सावन मगन वसावा ने इच्छापोर थाना क्षेत्र में रहने वाली अपने दोस्त की 15 साल पांच महीने की छोटी बहन को 8-11-19 को  शादी का झांसा देने के बाद खिड़की के माध्यम से खाली घर में प्रवेश किया। इस संबंध में पीड़ित बच्ची की मां ने आरोपित के खिलाफ पोक्सो एक्ट के उल्लंघन के लिए उसकी नाबालिग बेटी को अभिभावक की हिरासत से दुर्भावनापूर्ण इरादे से भगाकर उसका यौन शोषण करने का इच्छापोर पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज कराया है।

अदालत ने सुनाई सजा

बता दे कि तीन साल पहले दर्ज पोक्सो एक्ट के उल्लंघन के अपराध में आरोपी सावन वसावा के खिलाफ मामले की अंतिम सुनवाई आज हुई.सरकारी एपीपी दीपेश दवे ने मामले में आरोपी के खिलाफ गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए और अदालत ने आरोपी को सभी अपराधों का दोषी पाया।

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बचाव पक्ष ने की सजा कम करने की मांग, सरकार पक्ष ने दी ये दलील

 

आरोपी के बचाव पक्ष ने आरोपी की 19 साल की उम्र और घर पर अकेला कमाने वाला बताकर सजा में रहम रखने की मांग की। जिसके विरोध में सरकारपक्ष ने कहा कि आरोपी कोई और नहीं बल्कि पीड़िता की 15 वर्षीय लड़की के भाई का दोस्त है।  यदि अपराधी यह जानते हुए भी कि वह अवयस्क है, गंभीर अपराध करता है तो कारावास के स्थान पर अधिकतम दण्ड इस प्रकार दिया जाना चाहिए कि वह एक मिसाल कायम करे और कानूनी व्यवस्था को कायम रखे।

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नैतिकता के आधार पर दोस्त की बहन बहन

अदालत ने आरोपी को सजा सुनाई और कहा कि आरोपी पीड़ित लड़की के भाई का दोस्त होने के कारण नैतिक आधार पर आरोपी की बहन भी माना जा सकता है। हालांकि, अगर आरोपी ने 15 साल की लड़की का अपहरण और यौन शोषण किया है, तो आरोपी को अधिकतम सजा देना न्याय के हित में है।

(यौन उत्पीड़न के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पीड़िता की निजता का सम्मान करते हुए उनकी पहचान उजागर नहीं की गई है।)

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