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तक्षशिला दुर्घटना में मृतकों की याद में स्मारक बनाने की नगर पालिका की घोषणा


विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा के अंतिम समय में तक्षशिला स्मारक राजनीति

सूरत के सरथाना क्षेत्र के तक्षशिला अग्निकांड में 22 बच्चों की जिंदा मौत हो गई। जिससे पाटीदार इलाकों में भारतीय जनता पार्टी के प्रति खासा आक्रोश है। हजारों करोड़ के बजट वाला सूरत नगर निगम बच्चों की जान बचाने में नाकाम रहा। पीडि़त परिवार को आज तक न्याय नहीं मिला है। जिससे पाटीदारों के बीच भाजपा की छवि खराब हुई है। चुनाव आयोग द्वारा गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा से ठीक आधे घंटे पहले सूरत के मेयर ने तक्षशिला दुर्घटना में मृतकों की याद में स्मारक बनाने की घोषणा की है। 

तक्षशिला को चुनाव से पहले याद किया गया

सूरत नगर निगम के वर्ष 2022-23 के बजट में सरथाना क्षेत्र में तक्षशिला भवन दुर्घटना के पीडि़तों के लिए स्मारक निर्माण के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया गया है। जिसके तहत न्यू ईस्ट (सरथाना)क्षेत्र में एक नया जोन का निर्माण आयुक्त के प्रस्ताव दिनांक 1-11-2022 के अनुसार किया गया है। टाऊन प्लानिंग योजना संख्या 21 (सरथाना-सीमा), टी.पी. योजना संख्या 22 (सरथाना-वलक) या आसपास उपलब्ध स्थान में तक्षशिला त्रासदी के तहत मृतक को श्रद्धांजलि देने और याद करने के लिए स्मारक बनाने की सैद्धांतिक अनुमति दी जाएगी।

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तक्षशिला का मुद्दा आप पार्टी ने उठाया था

केजरीवाल ने जब सूरत का दौरा किया तो उन्होंने बराबर घटनास्थल तक्षशिला बिल्डिंग के सामने एक सभा आयोजित की। उस समय तक्षशिला के आरोपी की सजा पर घोषणा की थी। जितने आरपी हैं उसे सजा देने की बात चल रही थी। मृतक के परिजनों की ओर से बार-बार भाजपा नेताओं को ज्ञापन भी दिया गया। लेकिन उन्हें आज तक इंसाफ नहीं मिला है।

तक्षशिला स्मारक बनेगा : मेयर हेमाली बोघावाला

नगर निगम द्वारा हाल ही में हजारों करोड़ के विकास कार्यों की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने तक्षशिला स्मारक बनाने की भी बात कही थी। आज यह घोषणा की गई है कि स्मारक जल्दी बनाया जा सकता है।

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पाटीदारों को समझाने की कोशिश

जैसे ही तक्षशिला स्मारक की घोषणा हुई, इस पर बहस शुरू हो गई कि चुनाव आयोग द्वारा चुनावों की घोषणा से ठीक पहले ऐसा क्यों किया गया। शासकों को इस विज्ञापन करने के लिए क्यों मजबूर किया। इससे साफ है कि पाटीदारों की बैठक को लेकर इस तरह का फैसला लिया गया है। साल खत्म होने के बाद भी मृतकों के परिजन स्मारक का इंतजार कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी तक्षशिला को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाए और पाटीदारों के बीच बीजेपी की छवि खराब न हो उसके लिए तैयारी करते हुए अंतिम समय में स्मारक की घोषणा करनी पडी ऐसी चर्चा हो रही है। 

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