HomeNewsघारी सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि त्योहार का प्रतीक बन गया

घारी सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि त्योहार का प्रतीक बन गया


पहले सूरत में तेरवीं के मौके पर घारीयां और मगज बनाया जाता था लेकिन समय के साथ घारी का रंग बदल गया और अब स्वाद वाली घारीयां बनती हैं

कल चांदनी पाड़ा का पर्व है यानि सूरती का अपना पर्व है। इस दिन सूरत में घारीया खाने का एक अलग ही शान होता है। अब घारी सूरत के लिए मिठाई नहीं है, लेकिन सुरती त्योहार एक पहचान बन गया है, लेकिन बहुत कम सूरती लोगों को पता है कि यह वर्तमान मिठाई जो अब प्रीति भोजन है, सालों पहले प्रेत भोजन (मृत्यु के अवसर पर) थी। सालों पहले सूरत में स्वजन के अवसान के मौके पर धारी,मगज ( मोहनथाल) मिठाई बनायी जाती थी। लेकिन समय बीतने के साथ घारी का रंग बदल गया है और अब घारी विभिन्न स्वादों में उपलब्ध है और मिठाई की दुकानों में महंगी मिठाइयों में से एक मानी जाती है।

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घारीया जो अवसान प्रसंग का भोजन थी, अब प्रीति भोजन की मिठाई बन गइ

सूरती घारी सिर्फ सूरत, गुजरात या भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। चूंकि सुरती घारी का परीक्षण कई लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया है, अब सूरत घारी को चंदी पडवा से पहले विदेशों में पार्सल किया जा रहा है। सूरत की मिठाई की दुकानों और करोड़ों रुपये की घारी सुरत से मौसमी कारोबारियों के लिए चांदनी पड़वा कमाई का दिन है। 

घारी का इतिहास 1857 के विद्रोह से जुड़ा 

आज के युवाओं को मुश्किल से ही भारी परीक्षणों से उबरने वाली सुरती का इतिहास पता होगा। सूरत की घारी का इतिहास 1857 के विद्रोह से जुड़ा है। उस समय आसो वद पडवा था और तात्या टोपे की सेना ने सूरत में सामूहिक रूप से घारी खा ली। तब से सूरत में पडवा के दिन घारीया खाने की परंपरा चली आ रही है।

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घारीया परिवार और मित्रों के साथ सामुहिक रूप से खाई जाती है

आज घारीयां परिवार के साथ सामूहिक रूप से खाई जाती हैं और मित्र मंडली में घारी पहले भी सामूहिक रूप से खाई जाती थी लेकिन मृत्यु के अवसर पर इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। बरसों पहले जब सूरत में किसी की मृत्यु होती थी तो क्रियाविधि यानी बारहवें और तेरहवें दिन मगज ( मोहनथाल) या धारी बनाकर परोसी जाती थी। लेकिन स्वाद को पसंद करने वाली सुरतियों को घारी का स्वाद इस कदर पसंद आया कि धारी प्रेत भोज से अब प्रीति भोज बन गया है।

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घारी की आज एक डजन से अधिक फ्लेवर

इतना ही नहीं बल्कि किसी भी स्वाद को ट्विस्ट करने में माहिर सुरती ने तरह-तरह के फ्लेवर में घारीय़ां भी बनाई हैं। चॉकलेट का स्वाद आज के युवा पसंद करते हैं, चॉकलेट घारीय़ा से लेकर एक दर्जन से ज्यादा फ्लेवर में उपलब्ध हैं। कभी मौत के मौके पर खाई जाने वाली खारी अब चांदनी पाडवा में वीआईपी बन गई है और धारी किसी भी मिठाई के मुकाबले ज्यादा दाम पर बिक रही है और लोग इस घारी को खरीदने के लिए घंटों लाइन में खड़े नजर आते हैं।

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