HomeNewsओलपाड का भांडुत गांव गुजरात का पहला डीजल पंप मुक्त गांव बना

ओलपाड का भांडुत गांव गुजरात का पहला डीजल पंप मुक्त गांव बना


सूरत जिले के ओलपाड़ में भंडुत गांव अब शत-प्रतिशत सोलर पंप से संचालित हो गया है। अदाणी फाउंडेशन द्वारा गांव की 688 बीघा कृषि भूमि पर 5-एचपी के पंद्रह पंपों का प्रबंधन किया है। सार्वजनिक-निजी-भागीदारी ( पीपीपी) मॉडल की विशेषता वाली यह पहल पूरी तरह से कार्यरत हो गई है। ग्राम पंचायत और अदाणी फाउंडेशन ने सरकार के सिंचाई विभाग के मार्गदर्शन के साथ दो साल के भीतर डीजल से सौर ऊर्जा संचालित पंपों में रूपांतरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अदाणी फाउंडेशन ने राज्य सरकार की सिंचाई संबंधी योजनाओं को सुनिश्चित करने के लिए खेतों में सिंचाई पाइपलाइनों को स्थापित करने में सौर-पंप और ग्राम पंचायत भी सहायरूप हुआ है। 

डीजल पंप बंद होने से किसानों को हुआ आर्थिक लाभ

सोलर पंप लग जाने से किसानों के जीवन को काफी लाभ हुआ है। अदाणी फाउंडेशन हमेशा नवीनतम ज्ञान और प्रौद्योगिकी से लाभ उठाने के लिए कृषक समुदाय के लिए अधिक अवसर पैदा करने का प्रयास करता है। इस पहल के माध्यम से भांडुत गांव के 401 किसान अब डीजल नही खरीदकर धन की बचत करने के साथ श्रम लागत और समय भी बचा रहे हैं। डीजल पर सामूहिक रूप से औसत वार्षिक बचत को देखते हुए, किसानों को अंदाजित 9.13 लाख मासिक और वार्षिक 1.10 करोड रुपये तथा 20 लाख श्रम घंटे की बचत कर रहे है। साथ ही प्रति माह 3000 कामकाजी घंटे और सालाना 36000 घंटे की बचत होगी। इस पहल का एक प्रमुख अप्रत्यक्ष लाभ यह है कि इसने कुछ खेती योग्य भूमि की उपयोगिता में वृद्धि की है जो पहले सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण अनुत्पादक थी। 

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भांडुत गांव के लोगों ने अदाणी फाऊन्डेशन के भावेशभाई डोंडा का स्वागत किया

पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव , कार्बन उत्सर्जन समाप्त हो गया

डीजल से सौर तक संक्रमण का पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एक गणना के अनुसार डीजल पंपों के उन्मूलन से प्रति वर्ष गाँव से 269916 केजी कार्बन उत्सर्जन समाप्त हो गया है। गुजरात के कृषि, ऊर्जा और पेट्रोरसायन मंत्री मुकेश पटेल ने आज भांडुत गांव में स्वच्छ ऊर्जा (सौर जल पंप) पहल के अंतिम चरण का उद्घाटन किया और इसके साक्षी बने।

गुजरात सरकार के ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल और कृषि राज्य मंत्री  मुकेशभाई पटेल ने कहा, “भांडुत गांव के डीजल पंप मुक्त होने से गांव की 688 बीघा कृषि भूमि में खेती करने वाले 400 किसानों को लाभ हुआ है। अदाणी फाउंडेशन द्वारा संचालित पंद्रह 5-एचपी पंपों ने भूमि की सिंचाई की है। सार्वजनिक-निजी-भागीदारी मॉडल की विशेषता वाली इस योजना के कार्यान्वयन से लागत और समय की बचत के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि हुई है। ”

सोलार पंप से आर्थिक और सामाजिक विकास

हालांकि इस मुकाम तक पहुंचना कोई आसान उपलब्धि नहीं थी। पहले यह ग्रामीणों के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था क्योंकि सिंचाई के लिए पानी का मुख्य स्रोत केवल तीन तालाब थे और किसान डीजल से चलने वाले मोटर पंपों का इस्तेमाल आसपास के खेतों को पानी देने के लिए करते थे। इसके नुकसान भी थे जैसे उच्च डीजल लागत, डीजल मोटर शोर, वायु प्रदूषण में वृद्धि और श्रम और समय की बर्बादी। एक और बड़ा नुकसान यह था कि सभी किसान इन पंपों को खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते थे और इसलिए उन्हें किराए पर लेना पड़ता था जिसकी कीमत अधिक होती थी।

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सौर ऊर्जा के कारण सिंचाई की लागत शून्य

उन्होंने जल्द ही महसूस किया कि जब बड़े पैमाने पर खेती की जाती है, तो लागत बढ़ जाती है। इसलिए यदि वे कृषि में सौर ऊर्जा से चलने वाली सिंचाई का उपयोग करते हैं तो ओवरहेड लागत को कम किया जा सकता है। उस समय उन्होंने हजीरा स्थित अदाणी फाउंडेशन से मदद मांगी और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में 5 होर्स पावर (एचपी) का सोलर वाटर पंप स्थापित किया।

राकेशभाई पटेल और रसिकभाई पटेल, दोनों भाई जो किसान हैं और ओलपाड तालुका के भांडुत गांव के निवासी हैं, कहते हैं कि सौर ऊर्जा (सौर जल पंप) संचालित करके हमने हर साल हजारों की बचत की है। हमारे पास 10 बिघा जमीन है। जिसमें डीजल पंप के माध्यम से झील से सिंचाई के लिए डीजल पंप की वार्षिक लागत 60,000 रुपये थी। जिसकी आज सौर ऊर्जा के कारण शून्य प्रतिशत लागत है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि हम सहित पूरे गांव को करोड़ों का लाभ हुआ है। 

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सौर ऊर्जा से सिंचाई के लिए जलापूर्ति

अदाणी फाऊन्डेशन की पहल ने किया किसानों का सामाजिक परिवर्तन 

गांव की एक विधवा महिला किसान ज्योत्सनाबेन हर्षदभाई पटेल ने कहा कि “मेरे पास 3 बिघा जमीन है। पति की मृत्यु के बाद, मैं अपने दो बच्चों को खिलाने के लिए जमीन पर खेती करती हूं। मुझे सिंचाई के लिए एक डीजल पंप मशीन किराए पर लेनी पड़ी। और इसी वजह से ज्यादातर रात को अँधेरे में खेत में जाना पड़ता था। इस वजह से हर महीने मैं करीब 12 हजार खर्च करती थी। साथ ही जिस किसान के पास मशीन हो वह सुबह पानी की सिंचाई करें और शाम को हम जैसे छोटे किसानों को सिंचाई के लिए मशीन किराए पर दें। इस सोलर पंप से अब मुझे रात में सिंचाई के लिए नहीं जाना पड़ेगा। अब जो पैसा बचता है, मैं अपने बच्चे की शिक्षा पर खर्च कर सकती हूं।

भांडुत गांव अन्य गांवों के लिए प्रेरणा

सोलर वाटर पंप के कई फायदे हैं। यह दूरस्थ क्षेत्रों की सिंचाई कर सकता है, यह पर्यावरण के अनुकूल है, ईंधन की कोई आवश्यकता नहीं है और इसके लिए न्यूनतम रखरखाव की आवश्यकता होती है। आज भांडुत एक सफल टिकाऊ कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का एक चमकदार उदाहरण बन गया है और इसलिए यह एक आदर्श गांव है जो भारत के कई गांवों के लिए प्रेरणा का काम करता है।

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